Zakir Hussain Death : उस्ताद ज़ाकिर हुसैन का 73 वर्ष की आयु में निधन, संगीत जगत में शोक की लहर

Zakir Hussain Death : उस्ताद ज़ाकिर हुसैन का 73 वर्ष की आयु में निधन, संगीत जगत में शोक की लहर
प्रसिद्ध तबला वादक और संगीतकार उस्ताद ज़ाकिर हुसैन का 73 वर्ष की आयु में रविवार, 15 दिसंबर 2024 को निधन हो गया। वे अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में अस्पताल में भर्ती थे, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी।
उन्हें हृदय से जुड़ी गंभीर समस्याओं के कारण ICU में रखा गया था। उनकी तबीयत बिगड़ने की खबर उनके बहनोई अयूब औलिया ने दी थी। पत्रकार परवेज़ आलम ने भी यह जानकारी साझा की और बताया कि ज़ाकिर हुसैन का इलाज गंभीर बीमारियों के लिए चल रहा था। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, उस्ताद ज़ाकिर हुसैन पिछले एक हफ्ते से हृदय संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे थे।
उनके करीबी मित्र और प्रसिद्ध बांसुरी वादक राकेश चौरसिया ने पीटीआई से बातचीत में बताया, “ज़ाकिर साहब ICU में हैं और उनकी हालत नाजुक है। हम सब उनकी सेहत को लेकर चिंतित हैं।” उनके निधन की खबर ने पूरे संगीत जगत और उनके प्रशंसकों को गहरे शोक में डाल दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) पर दुनियाभर से लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
ज़ाकिर हुसैन: संगीत के महारथी और प्रेरणा स्रोत
9 मार्च 1951 को जन्मे उस्ताद ज़ाकिर हुसैन महान तबला वादक उस्ताद अल्ला रक्खा के सबसे बड़े पुत्र थे। मात्र 7 साल की उम्र में उन्होंने पहला संगीत कार्यक्रम दिया और 11 साल की उम्र में ही उनका संगीत दौरा शुरू हो गया था।
संगीत के अलावा ज़ाकिर हुसैन ने 1989 में फ़िल्म ‘हीट एंड डस्ट’ से अभिनय में भी कदम रखा। इस फ़िल्म में उन्होंने अभिनय के साथ-साथ संगीत भी तैयार किया था। उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत के साथ-साथ फिल्मों और विश्व मंचों पर भी अपनी पहचान बनाई।
व्हाइट हाउस में पहले भारतीय संगीतकार
उस्ताद ज़ाकिर हुसैन पहले भारतीय संगीतकार थे जिन्हें अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा व्हाइट हाउस में आयोजित ऑल-स्टार ग्लोबल कॉन्सर्ट में आमंत्रित किया गया था। यह उनके वैश्विक स्तर पर योगदान का एक बड़ा उदाहरण था।
1978 में उन्होंने इटैलियन-अमेरिकन कथक नृत्यांगना एंटोनिया मिनेकॉला से विवाह किया। यह जोड़ा दो बेटियों के माता-पिता हैं।
संगीत जगत में अपूरणीय क्षति
भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने उनके निधन की पुष्टि की है, हालांकि परिवार की ओर से आधिकारिक बयान का इंतजार है। उस्ताद ज़ाकिर हुसैन के निधन से भारतीय संगीत और संस्कृति को भारी क्षति हुई है। उनके योगदान को संगीत जगत सदैव याद रखेगा।
उनकी कला और व्यक्तित्व ने न केवल भारत, बल्कि विश्व मंच पर भी भारतीय संगीत को गौरवान्वित किया। उस्ताद ज़ाकिर हुसैन का संगीत हमेशा उनके प्रशंसकों के दिलों में जीवित रहेगा।
अविस्मरणीय योगदान और प्रेरणा का स्रोत
उस्ताद ज़ाकिर हुसैन का जीवन संगीत के प्रति समर्पण और नई ऊंचाइयों को छूने का एक प्रतीक है। उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत को वैश्विक मंच पर पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी तालों में न केवल संगीत की गहराई थी, बल्कि हर धुन में एक कहानी बसी होती थी।
उन्हें उनके अद्वितीय योगदान के लिए कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। भारत सरकार ने उन्हें 1988 में पद्म श्री, 2002 में पद्म भूषण, और 2023 में पद्म विभूषण जैसे उच्च नागरिक सम्मानों से नवाजा।
नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा
ज़ाकिर हुसैन ने अपनी कला से लाखों लोगों को प्रेरित किया और संगीत की दुनिया में एक ऐसी विरासत छोड़ी, जो हमेशा नई पीढ़ी के कलाकारों का मार्गदर्शन करेगी। उनके व्यक्तित्व की सरलता और संगीत की जटिलता का अद्भुत संतुलन उन्हें अन्य कलाकारों से अलग बनाता था।
संगीत जगत की प्रतिक्रिया
उनके निधन की खबर सुनकर संगीत और कला जगत के दिग्गजों ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने शोक और संवेदनाएं व्यक्त की हैं। कई कलाकारों ने उन्हें “संगीत की आत्मा” और “तबले की धड़कन” कहकर श्रद्धांजलि दी।
उनके मित्र और सहयोगी कलाकारों ने कहा कि उस्ताद ज़ाकिर हुसैन का जाना एक युग का अंत है। उनकी रचनाएं और प्रस्तुतियां आने वाले समय में संगीतकारों और श्रोताओं को प्रेरित करती रहेंगी।
उनकी विरासत और स्मृति
उस्ताद ज़ाकिर हुसैन का संगीत न केवल भारतीय परंपराओं का प्रतीक है, बल्कि यह उस जज़्बे का उदाहरण भी है जो किसी कला को जीवन के हर पहलू से जोड़ता है। उनकी विरासत उनकी रचनाओं, उनके छात्रों और उनकी धुनों में सदैव जीवित रहेगी।
उनके जाने से एक खालीपन महसूस हो रहा है, जिसे भर पाना मुश्किल है। लेकिन उनकी अमर रचनाएं हमें हमेशा उनके जीवन और संगीत को याद दिलाती रहेंगी। संगीत प्रेमी उन्हें उनकी कला और मानवता के प्रति उनके अद्भुत योगदान के लिए हमेशा याद करेंगे।
“उस्ताद ज़ाकिर हुसैन की कला हमें यह सिखाती है कि संगीत केवल ध्वनियों का मेल नहीं, बल्कि आत्मा का उत्सव है।”
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